(N/A) ऑक्सीजन की धातुओं की उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाओं को स्थिर करने की क्षमता फ्लोरीन से अधिक है क्योंकि यह धातु के साथ बहु-आबंध (multiple bonds) बना सकता है।
निम्न ऑक्सीकरण अवस्था वाले धातु ऑक्साइड क्षारीय होते हैं,जबकि उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था वाले ऑक्साइड अम्लीय होते हैं। मध्यवर्ती ऑक्सीकरण अवस्था वाले धातु ऑक्साइड उभयधर्मी (amphoteric) होते हैं।
उदाहरण के लिए: $Mn_{2}O_{7}$ अम्लीय है,$MnO$ क्षारीय है,जबकि $Mn_{3}O_{4}$,$Mn_{2}O_{3}$ और $MnO_{2}$ उभयधर्मी हैं। इसी प्रकार $CrO$ क्षारीय है लेकिन $Cr_{2}O_{3}$ उभयधर्मी है।
ऑक्साइड सामान्यतः उच्च तापमान पर धातुओं की ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया से बनते हैं। स्कैंडियम केवल एक ऑक्साइड $Sc_{2}O_{3}$ बनाता है जिसमें इसकी ऑक्सीकरण अवस्था $(+3)$ है। ऑक्सीकरण अवस्था समूह संख्या के साथ मेल खाती है,जो मैंगनीज तक देखी जाती है (जैसे,$Mn_{2}O_{7}$)। मैंगनीज के बाद,आयरन को छोड़कर कोई अन्य तत्व $M_{2}O_{3}$ प्रकार का ऑक्साइड नहीं बनाता है (जैसे,$Fe_{2}O_{3}$)।
यद्यपि फेरेट्स $(FeO_{4}^{2-})$ क्षारीय माध्यम में बनते हैं,वे आसानी से विघटित होकर $Fe_{2}O_{3}$ और $O_{2}$ देते हैं। ऑक्साइड के अलावा,ऑक्सोकेटायन $V^{+5}$ को $VO_{2}^{+}$ के रूप में,$V^{4+}$ को $VO^{2+}$ के रूप में और $Ti^{4+}$ को $TiO^{2+}$ के रूप में स्थिर करते हैं। $V_{2}O_{5}$ उभयधर्मी है,हालांकि मुख्य रूप से अम्लीय है और यह $VO_{4}^{3-}$ के साथ-साथ $VO^{2+}$ लवण भी देता है। वैनेडियम में क्षारीय $V_{2}O_{3}$ से कम क्षारीय $V_{2}O_{4}$ और उभयधर्मी $V_{2}O_{5}$ तक क्रमिक परिवर्तन होता है। $V_{2}O_{4}$ अम्ल में घुलकर $VO^{2+}$ लवण देता है,जबकि $V_{2}O_{5}$ क्षार में घुलने पर $VO_{4}^{3-}$ और अम्ल में $VO_{2}^{+}$ आयन देता है।
निम्न ऑक्सीकरण अवस्था वाले धातु ऑक्साइड ऑक्सीकृत होने की क्षमता रखते हैं और इसलिए क्षारीय होते हैं,जबकि उच्च ऑक्सीकरण अवस्था वाले ऑक्साइड अपचयित (reduced) होने की प्रवृत्ति रखते हैं और इसलिए प्रकृति में अम्लीय होते हैं। धातु ऑक्साइड की आयनिक प्रकृति धातु की ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि के साथ घटती है। उदाहरण के लिए,$Mn_{2}O_{7}$ एक सहसंयोजक हरा तेल है,जबकि $CrO_{3}$ और $V_{2}O_{5}$ के गलनांक कम होते हैं।