(A) तार का प्रतिरोध $R = \rho \frac{l}{A}$ सूत्र द्वारा दिया जाता है।
जहाँ:
$\rho$ = तार के पदार्थ की प्रतिरोधकता।
$l$ = तार की लंबाई।
$A$ = तार के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल।
इस सूत्र से स्पष्ट है कि प्रतिरोध,अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है $(R \propto \frac{1}{A})$।
मोटे तार का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल अधिक होता है,जिसके परिणामस्वरूप प्रतिरोध कम होता है। इसके विपरीत,पतले तार का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल कम होता है,जिससे प्रतिरोध अधिक होता है।
चूंकि विद्युत धारा कम प्रतिरोध वाले पथ से अधिक आसानी से प्रवाहित होती है,इसलिए समान स्रोत से जोड़ने पर मोटे तार से विद्युत धारा पतले तार की तुलना में अधिक आसानी से प्रवाहित होगी।