जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के घोल में डुबोया जाता है,तो घोल का रंग क्यों बदल जाता है?

Vedclass pdf generator app on play store
Vedclass iOS app on app store
(N/A) जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के घोल में रखा जाता है,तो लोहा कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील होने के कारण कॉपर सल्फेट के घोल से कॉपर को विस्थापित कर देता है। इस अभिक्रिया में आयरन सल्फेट बनता है,जो हरे रंग का होता है।
$Fe_{(s)} + CuSO_{4(aq)} \rightarrow FeSO_{4(aq)} + Cu_{(s)}$
इस अभिक्रिया में,कॉपर सल्फेट के घोल का नीला रंग हल्का पड़ जाता है क्योंकि यह हल्के हरे रंग के आयरन सल्फेट के घोल में परिवर्तित हो जाता है और लोहे की कील पर कॉपर की लाल-भूरे रंग की परत जम जाती है।

Explore More

Similar Questions

निम्नलिखित अभिक्रियाओं में उन पदार्थों की पहचान कीजिए जिनका उपचयन (ऑक्सीकरण) तथा अपचयन (अपचयन) हो रहा है।
$(i)$ $4Na(s) + O_2(g) \rightarrow 2Na_2O(s)$
$(ii)$ $CuO(s) + H_2(g) \rightarrow Cu(s) + H_2O(l)$

चित्र में दी गई अभिक्रिया के अलावा द्वि-विस्थापन अभिक्रिया का एक उदाहरण दीजिए।

निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए अवस्था संकेतों के साथ संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
$(i)$ जल में बेरियम क्लोराइड और सोडियम सल्फेट के विलयन अभिक्रिया करके अघुलनशील बेरियम सल्फेट और सोडियम क्लोराइड का विलयन बनाते हैं।
$(ii)$ सोडियम हाइड्रॉक्साइड का विलयन (जल में) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के विलयन (जल में) से अभिक्रिया करके सोडियम क्लोराइड का विलयन और जल उत्पन्न करता है।

Difficult
View Solution

वियोजन अभिक्रियाओं के लिए एक-एक समीकरण लिखिए जिनमें ऊर्जा ऊष्मा,प्रकाश या विद्युत के रूप में दी जाती है।

Difficult
View Solution

वियोजन अभिक्रियाओं को संयोजन अभिक्रियाओं के विपरीत क्यों कहा जाता है? इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए।

Vedclass Products

For Students

Vedclass Test Series

Mock tests in real JEE/NEET style with performance analysis. 5-day free trial.

Start Free Trial
For Teachers

Exam Paper Generator

Generate Set A/B/C/D exam papers from 7.5L+ questions in 2 minutes. 3 chapters free.

Try Free
For Institutes

Online Exam Module

Live online exams with unlimited students, 360° analytics & white-label branding.

See Demo