(N/A) एक धारावाही चालक अपने चारों ओर अपना चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। जब यह क्षेत्र बाहरी चुंबकीय क्षेत्र के साथ अन्योन्यक्रिया करता है,तो उस पर एक यांत्रिक बल कार्य करता है।
इस बल की दिशा दो कारकों पर निर्भर करती है:
$1$. चालक से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा की दिशा।
$2$. बाहरी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा।
इस बल की दिशा निर्धारित करने के लिए $Fleming's \text{ } Left-Hand \text{ } Rule$ (फ्लेमिंग के बाएं हाथ का नियम) का उपयोग किया जाता है।
$Fleming's \text{ } Left-Hand \text{ } Rule$ का कथन: अपने बाएं हाथ के अंगूठे,तर्जनी और मध्यमा उंगली को इस प्रकार फैलाएं कि वे एक-दूसरे के परस्पर लंबवत हों। यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को दर्शाती है और मध्यमा विद्युत धारा की दिशा को दर्शाती है,तो अंगूठा चालक पर लगने वाले बल (या गति) की दिशा को इंगित करेगा।