(A) किसी यौगिक की अम्लता उसके संयुग्मी क्षार (conjugate base) की स्थिरता पर निर्भर करती है।
$1$. कार्बोक्सिलिक अम्ल $(R-COOH)$ एक प्रोटॉन खोकर कार्बोक्सिलेट आयन $(R-COO^-)$ बनाते हैं। यह आयन दो समान अनुनाद संरचनाओं द्वारा स्थिर होता है जहाँ ऋणात्मक आवेश दो अत्यधिक विद्युत-ऋणात्मक ऑक्सीजन परमाणुओं पर विस्थानीकृत (delocalized) होता है।
$2$. फिनोल $(C_6H_5OH)$ एक प्रोटॉन खोकर फिनोक्साइड आयन $(C_6H_5O^-)$ बनाते हैं। हालाँकि फिनोक्साइड आयन अनुनाद द्वारा स्थिर होता है,लेकिन ऋणात्मक आवेश बेंजीन वलय के कम विद्युत-ऋणात्मक कार्बन परमाणुओं पर विस्थानीकृत होता है,जिससे यह कार्बोक्सिलेट आयन की तुलना में कम स्थिर हो जाता है।
$3$. अल्कोहल $(R-OH)$ एक प्रोटॉन खोने के बाद एल्कोक्साइड आयन $(R-O^-)$ बनाते हैं। इन आयनों में कोई अनुनाद स्थिरता नहीं होती है,जिससे ये सबसे कम स्थिर और इसलिए सबसे कम अम्लीय होते हैं।
अतः,फिनोक्साइड और एल्कोक्साइड आयनों की तुलना में कार्बोक्सिलेट आयन की अधिक स्थिरता के कारण,कार्बोक्सिलिक अम्ल अधिक अम्लीय होते हैं।