(N/A) अपनी जीवनशैली के अनुसार, परजीवियों ने अपने परपोषी (host) के भीतर या उस पर जीवित रहने के लिए विशेष अनुकूलन विकसित किए हैं।
$1$. अनावश्यक संवेदी अंगों का लोप: चूंकि परजीवी परपोषी के भीतर एक स्थिर वातावरण में रहते हैं, इसलिए वे अक्सर उन जटिल संवेदी अंगों को खो देते हैं जिनकी उन्हें आवश्यकता नहीं होती है।
$2$. आसंजक अंगों या चूषकों की उपस्थिति: ये संरचनाएं परजीवी को परपोषी से मजबूती से चिपके रहने में मदद करती हैं। उदाहरण के लिए, $Taenia$ (\text{फीताकृमि}) में जुड़ने के लिए चूषक और हुक होते हैं।
$3$. पाचन तंत्र का लोप: कई अंतःपरजीवी, जैसे \text{फीताकृमि}, सीधे अपनी शरीर की सतह के माध्यम से परपोषी के शरीर से पोषक तत्वों को अवशोषित करते हैं, जिससे एक जटिल पाचन तंत्र का ह्रास या लोप हो जाता है।
$4$. उच्च प्रजनन क्षमता: संतानों की उच्च मृत्यु दर के बावजूद प्रजाति के अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए, परजीवी अक्सर अत्यधिक उच्च प्रजनन क्षमता प्रदर्शित करते हैं। उदाहरण के लिए, $Ascaris$ (\text{गोलकृमि}) बड़ी संख्या में अंडे उत्पन्न करता है।
$5$. जटिल जीवन चक्र: कई परजीवियों के जीवन चक्र जटिल होते हैं, जिसमें अक्सर प्राथमिक परपोषी के संक्रमण को सुविधाजनक बनाने के लिए एक या दो मध्यवर्ती परपोषी या वाहक शामिल होते हैं।