(N/A) वाष्पीकरण: विलयन को तब तक गर्म किया जाता है जब तक कि पानी वाष्पित न हो जाए,जिससे ठोस सोडियम क्लोराइड पीछे रह जाता है।
$(b)$ ऊर्ध्वपातन: गर्म करने पर अमोनियम क्लोराइड ऊर्ध्वपातित हो जाता है,जबकि सोडियम क्लोराइड नहीं होता,जिससे पृथक्करण संभव हो जाता है।
$(c)$ निस्यंदन (फिल्ट्रेशन): धातु के टुकड़े ठोस कण होते हैं जिन्हें फिल्टर का उपयोग करके तरल तेल से अलग किया जा सकता है।
$(d)$ क्रोमैटोग्राफी: इस तकनीक का उपयोग विलायक में विभिन्न रंजकों की अलग-अलग घुलनशीलता के आधार पर उन्हें अलग करने के लिए किया जाता है।
$(e)$ अपकेंद्रण (सेंट्रीफ्यूजेशन): दही को तेज गति से घुमाकर मक्खन अलग किया जाता है,जिससे सघन घटक नीचे बैठ जाते हैं और हल्का मक्खन ऊपर आ जाता है।