(N/A) किसी उपग्रह को एक निश्चित कक्षा में पृथ्वी के चारों ओर घूमने के लिए आवश्यक वेग को उपग्रह का कक्षीय वेग कहा जाता है।
मान लीजिए कि $m$ द्रव्यमान का एक उपग्रह पृथ्वी की सतह से $h$ ऊँचाई पर है और चित्र में दिखाए अनुसार पृथ्वी के चारों ओर घूम रहा है। पृथ्वी के केंद्र से इसकी दूरी $r = R_E + h$ है। मान लीजिए उपग्रह का कक्षीय वेग $v_0$ है।
पृथ्वी द्वारा उपग्रह पर लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल:
$F = \frac{G M_E m}{r^2}$
उपग्रह की वृत्तीय गति के लिए आवश्यक अभिकेंद्र बल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा प्रदान किया जाता है:
$F_c = \frac{m v_0^2}{r}$
अभिकेंद्र बल को गुरुत्वाकर्षण बल के बराबर रखने पर:
$\frac{m v_0^2}{r} = \frac{G M_E m}{r^2}$
समीकरण को सरल करने पर:
$v_0^2 = \frac{G M_E}{r}$
$r = R_E + h$ प्रतिस्थापित करने पर:
$v_0 = \sqrt{\frac{G M_E}{R_E + h}}$
यह समीकरण दर्शाता है कि जैसे-जैसे ऊँचाई $h$ बढ़ती है,कक्षीय वेग $v_0$ घटता जाता है।