(N/A) परमाणु में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा इस प्रकार दी जाती है:
$E_{n} = -\frac{m Z^{2} e^{4}}{8 n^{2} h^{2} \epsilon_{0}^{2}}$
इसे सरल करने पर:
$E_{n} = -\frac{13.6 Z^{2}}{n^{2}} \text{ eV}$
ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे $n$ का मान बढ़ता है,ऋणात्मक ऊर्जा का परिमाण घटता है,जिसका अर्थ है कि नाभिक से दूर की कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा बढ़ती है।
जब इलेक्ट्रॉन नाभिक के सबसे निकट की कक्षा $(n = 1)$ में होता है,तो उसकी ऊर्जा सबसे कम (अधिकतम ऋणात्मक मान) होती है। इस अवस्था को मूल अवस्था (ground state) कहा जाता है।
हाइड्रोजन परमाणु के लिए $(Z = 1, n = 1)$:
$E_{1} = -13.6 \text{ eV}$
आयनन ऊर्जा वह न्यूनतम ऊर्जा है जो इलेक्ट्रॉन को मूल अवस्था से अनंत तक ले जाने के लिए आवश्यक है। हाइड्रोजन के लिए यह $13.6 \text{ eV}$ है।
उत्तेजन ऊर्जा वह ऊर्जा है जो इलेक्ट्रॉन को मूल अवस्था से उच्च ऊर्जा अवस्था में ले जाने के लिए आवश्यक है। पहली उत्तेजित अवस्था $(n = 2)$ के लिए:
$E_{2} = -\frac{13.6}{2^{2}} = -3.4 \text{ eV}$
$\Delta E = E_{2} - E_{1} = -3.4 - (-13.6) = 10.2 \text{ eV}$