(N/A) $\rightarrow$ तना पादप अक्ष का वह आरोही भाग है जो शाखाओं, पत्तियों, फूलों और फलों को धारण करता है। यह अंकुरित बीज के भ्रूण के $\text{प्रांकुर}$ (plumule) से विकसित होता है।
$\rightarrow$ तने की विशेषता इसमें $\text{पर्व}$ (nodes) और $\text{पर्वसंधि}$ (internodes) की उपस्थिति है। तने का वह क्षेत्र जहाँ पत्तियाँ उत्पन्न होती हैं, $\text{पर्व}$ कहलाता है, जबकि दो पर्वों के बीच के भाग को $\text{पर्वसंधि}$ कहते हैं।
$\rightarrow$ तने पर कलिकाएँ होती हैं, जो अग्रस्थ या कक्षस्थ हो सकती हैं। यह सामान्यतः युवा अवस्था में हरा होता है और बाद में अक्सर काष्ठीय और गहरे भूरे रंग का हो जाता है।
$\rightarrow$ तने के मुख्य कार्य:
$(i)$ पत्तियों, फूलों और फलों को धारण करने वाली शाखाओं का विस्तार करना।
$(ii)$ यह जड़ों और पत्तियों के बीच जल, खनिजों और प्रकाश-संश्लेषित भोजन का संवहन करता है।
$(iii)$ कुछ तने भोजन का भंडारण, यांत्रिक सहारा, सुरक्षा और कायिक प्रवर्धन जैसे विशेष कार्य भी करते हैं।