(N/A) प्रकाश-विद्युत समीकरण $h\nu = \phi_0 + eV_0$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $h$ प्लांक नियतांक है,$\nu$ आपतित विकिरण की आवृत्ति है,$\phi_0$ कार्य फलन (work function) है और $V_0$ निरोधी विभव (stopping potential) है।
$V_0$ के लिए समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करने पर,हमें $V_0 = (\frac{h}{e})\nu - \frac{\phi_0}{e}$ प्राप्त होता है।
इसे एक सीधी रेखा के समीकरण $y = mx + c$ के साथ तुलना करने पर,ढाल $m = \frac{h}{e}$ प्राप्त होता है।
$V_0 - \nu$ ग्राफ का ढाल $\frac{h}{e}$ है,जो एक सार्वभौमिक नियतांक है।
चूंकि $h$ (प्लांक नियतांक) और $e$ (इलेक्ट्रॉन का आवेश) सार्वभौमिक नियतांक हैं,इसलिए ढाल प्रकाश-संवेदी सतह के लिए उपयोग किए जाने वाले पदार्थ के प्रकार पर निर्भर नहीं करता है।