(N/A) विन्यास का प्रतिधारण: यदि किसी रासायनिक अभिक्रिया में,त्रिविम केंद्र (कायरल केंद्र) से जुड़े कोई भी बंध नहीं टूटते हैं,तो उत्पाद में त्रिविम केंद्र के चारों ओर समूहों की सामान्य स्थानिक व्यवस्था अभिकारक के समान ही रहती है। इसे विन्यास का प्रतिधारण कहा जाता है।
उदाहरण: $(-)-2-$मिथाइलब्यूटेन$-1-$ऑल की सांद्र $HCl$ के साथ अभिक्रिया में कायरल केंद्र पर प्रतिधारण होता है:
$(-)-CH_3CH_2CH(CH_3)CH_2OH + HCl \xrightarrow{\Delta} (+)-CH_3CH_2CH(CH_3)CH_2Cl + H_2O$
विन्यास का प्रतिलोमन: यदि आने वाला न्यूक्लियोफाइल कायरल केंद्र पर लीविंग ग्रुप के विपरीत दिशा से आक्रमण करता है,तो उत्पाद में कायरल केंद्र के चारों ओर समूहों की स्थानिक व्यवस्था अभिकारक के विपरीत होती है। इसे वाल्डन प्रतिलोमन या विन्यास का प्रतिलोमन कहा जाता है।
उदाहरण: $(R)-2-$ब्रोमोब्यूटेन की $OH^-$ के साथ $S_N2$ अभिक्रिया से $(S)-$ब्यूटेन$-2-$ऑल का निर्माण होता है:
$R-C(C_2H_5)(CH_3)(C_6H_5)Br + OH^- \rightarrow HO-C(C_2H_5)(CH_3)(C_6H_5) + Br^-$