(N/A) अंतःस्थापन (implantation) के बाद,ट्रोफोब्लास्ट पर अंगुली जैसी संरचनाएं उभरती हैं जिन्हें जरायुज अंकुर (chorionic villi) कहा जाता है,जो गर्भाशय के ऊतकों और मातृ रक्त से घिरे होते हैं।
जरायुज अंकुर और गर्भाशय के ऊतक एक-दूसरे के साथ अंतर्ग्रथित (interdigitated) हो जाते हैं और संयुक्त रूप से विकासशील भ्रूण और मातृ शरीर के बीच एक संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई बनाते हैं,जिसे अपरा (placenta) कहा जाता है।
अपरा के कार्य:
$1$. अपरा भ्रूण को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति की सुविधा प्रदान करता है।
$2$. यह भ्रूण द्वारा उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड और उत्सर्जी अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में भी मदद करता है।
$3$. अपरा एक गर्भनाल (umbilical cord) के माध्यम से भ्रूण से जुड़ा होता है,जो भ्रूण तक और भ्रूण से पदार्थों के परिवहन में मदद करता है।
अपरा द्वारा उत्पन्न हार्मोन:
अपरा एक अंतःस्रावी ऊतक के रूप में भी कार्य करता है और कई हार्मोन उत्पन्न करता है:
$(i)$ ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन $(hCG)$
$(ii)$ ह्यूमन प्लेसेंटल लैक्टोजेन $(hPL)$
$(iii)$ एस्ट्रोजन्स
$(iv)$ प्रोजेस्टोजन्स
इसके अतिरिक्त:
$(v)$ गर्भावस्था के अंतिम चरण में अंडाशय द्वारा रिलैक्सिन नामक हार्मोन भी स्रावित होता है।
$(vi)$ $hCG$,$hPL$ और रिलैक्सिन केवल गर्भावस्था के दौरान ही महिलाओं में उत्पन्न होते हैं।
$(vii)$ गर्भावस्था के दौरान मातृ रक्त में एस्ट्रोजन्स,प्रोजेस्टोजन्स,कोर्टिसोल,प्रोलैक्टिन,थायरोक्सिन आदि जैसे अन्य हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है।
ये हार्मोन भ्रूण के विकास,मां में चयापचय परिवर्तनों और गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।