(N/A) जब $1 \ mol$ अवाष्पशील विलेय को $1 \ kg$ विलायक में घोला जाता है,तो विलयन के क्वथनांक में होने वाली वृद्धि को क्वथनांक उन्नयन कहा जाता है।
विलयन का क्वथनांक हमेशा शुद्ध विलायक से अधिक होता है। यह उन्नयन विलेय के कणों की संख्या पर निर्भर करता है,न कि उनकी प्रकृति पर।
माना $T_{b}^{0}$ शुद्ध विलायक का क्वथनांक है और $T_{b}$ विलयन का क्वथनांक है। क्वथनांक में वृद्धि $\Delta T_{b} = T_{b} - T_{b}^{0}$ है।
तनु विलयनों के लिए,क्वथनांक उन्नयन $(\Delta T_{b})$ विलेय की मोललता $(m)$ के सीधे समानुपाती होता है:
$\Delta T_{b} \propto m$
$\Delta T_{b} = K_{b} \times m$
जहाँ $K_{b}$ क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक या एबुलियोस्कोपिक स्थिरांक है। इसका मात्रक $K \ kg \ mol^{-1}$ है।
यदि $M_{2}$ मोलर द्रव्यमान वाले $w_{2}$ ग्राम विलेय को $w_{1}$ ग्राम विलायक में घोला जाता है,तो मोललता $(m)$ है:
$m = \frac{w_{2} \times 1000}{M_{2} \times w_{1}}$
$\Delta T_{b}$ के समीकरण में $m$ का मान रखने पर:
$\Delta T_{b} = \frac{K_{b} \times 1000 \times w_{2}}{M_{2} \times w_{1}}$
विलेय का मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए सूत्र:
$M_{2} = \frac{1000 \times w_{2} \times K_{b}}{\Delta T_{b} \times w_{1}}$