कुंडली (coil) के लिए चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण (magnetic dipole moment) क्या है? इसका $SI$ मात्रक और विमीय सूत्र लिखिए तथा इसकी स्थायी और अस्थायी संतुलन अवस्थाओं की व्याख्या कीजिए।

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(A) धारावाही कुंडली का चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण,कुंडली से प्रवाहित धारा और उसके क्षेत्रफल सदिश का गुणनफल होता है।
यदि $A$ क्षेत्रफल वाली कुंडली से $I$ धारा प्रवाहित हो रही है,तो चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण $\vec{m} = I\vec{A}$ द्वारा दिया जाता है।
यदि कुंडली में फेरों की संख्या $N$ है,तो द्विध्रुव आघूर्ण $\vec{m} = NI\vec{A}$ होता है।
चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण का $SI$ मात्रक $A \cdot m^2$ (एम्पियर-मीटर वर्ग) है।
इसका विमीय सूत्र $[M^0 L^2 T^0 A^1]$ है।
बाह्य चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ में रखे चुंबकीय द्विध्रुव पर कार्य करने वाला बल आघूर्ण (टॉर्क) $\vec{\tau} = \vec{m} \times \vec{B}$ होता है,जिसका परिमाण $\tau = mB \sin \theta$ है।
स्थायी संतुलन: जब चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण $\vec{m}$,चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ के समांतर होता है $(\theta = 0^\circ)$,तो टॉर्क शून्य होता है। इस स्थिति में स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम $(U = -mB)$ होती है,जो स्थायी संतुलन को दर्शाती है।
अस्थायी संतुलन: जब चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण $\vec{m}$,चुंबकीय क्षेत्र $\vec{B}$ के प्रति-समांतर होता है $(\theta = 180^\circ)$,तो टॉर्क शून्य होता है। इस स्थिति में स्थितिज ऊर्जा अधिकतम $(U = +mB)$ होती है,जो अस्थायी संतुलन को दर्शाती है।

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