(N/A) विद्युत क्षेत्र में स्थित वह काल्पनिक पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर विद्युत विभव समान होता है,उसे समविभव पृष्ठ कहते हैं।
$(1)$ एक बिंदु आवेश $q$ के लिए,$r$ दूरी पर विभव $V = \frac{kq}{r}$ होता है। चूँकि $r$ स्थिर होने पर $V$ स्थिर रहता है,इसलिए समविभव पृष्ठ आवेश को केंद्र मानकर बनाए गए संकेंद्रीय गोले होते हैं।
$(2)$ द्विध्रुव ($+q$ और $-q$) के लिए,मध्य तल पर विभव शून्य होता है। समविभव पृष्ठ विकृत गोले होते हैं,जो आवेशों के पास एक-दूसरे के करीब और बीच में दूर होते हैं।
$(3)$ दो समान आवेशों ($+q$ और $+q$) के लिए,आवेशों के पास विभव अधिक होता है। समविभव पृष्ठ विकृत गोले होते हैं जो मध्य तल को नहीं काटते हैं।
$(4)$ एकसमान विद्युत क्षेत्र के लिए,समविभव पृष्ठ विद्युत क्षेत्र रेखाओं की दिशा के लंबवत समानांतर समतलों का एक समूह होते हैं।