परमाणु त्रिज्या परमाणु के नाभिक के केंद्र से उसके सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन कोश तक की दूरी है। यह परमाणु के आकार को मापती है।
धातुओं के लिए,यह धात्विक त्रिज्या है,जिसे धात्विक क्रिस्टल में दो निकटवर्ती धातु परमाणुओं के बीच की अंतर-नाभिकीय दूरी के आधे के रूप में परिभाषित किया जाता है। उदाहरण के लिए,ठोस कॉपर में अंतर-नाभिकीय दूरी $256 \, pm$ है,इसलिए धात्विक त्रिज्या $\frac{256}{2} \, pm = 128 \, pm$ है।
अधातुओं के लिए,यह सहसंयोजक त्रिज्या है,जिसे एक सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़े दो परमाणुओं के नाभिकों के बीच की दूरी के आधे के रूप में परिभाषित किया जाता है। उदाहरण के लिए,$Cl_2$ अणु में दो क्लोरीन परमाणुओं के बीच की दूरी $198 \, pm$ है,इसलिए सहसंयोजक त्रिज्या $\frac{198}{2} \, pm = 99 \, pm$ है।
आयनिक त्रिज्या एक आयन के नाभिक के केंद्र से उसके बाहरी कोश तक की प्रभावी दूरी है। धनायन (cations) अपने मूल परमाणुओं से छोटे होते हैं क्योंकि इलेक्ट्रॉन निकलने से प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है (जैसे,$Na^+$ $95 \, pm$ है जबकि $Na$ $186 \, pm$ है)। ऋणायन (anions) अपने मूल परमाणुओं से बड़े होते हैं क्योंकि इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण बढ़ जाता है और प्रभावी नाभिकीय आवेश कम हो जाता है (जैसे,$F^-$ $136 \, pm$ है जबकि $F$ $64 \, pm$ है)।