जल का ऑटो-प्रोटोलेसिस (स्व-आयनीकरण) एक रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें जल के दो अणु अभिक्रिया करके एक हाइड्रॉक्साइड आयन $(OH^{-})$ और एक हाइड्रोनियम आयन $(H_{3}O^{+})$ उत्पन्न करते हैं। इस अभिक्रिया को निम्न प्रकार से दर्शाया जा सकता है:
$H_{2}O_{(l)} + H_{2}O_{(l)} \leftrightarrow H_{3}O_{(aq)}^{+} + OH_{(aq)}^{-}$
जल का ऑटो-प्रोटोलेसिस इसकी उभयधर्मी (amphoteric) प्रकृति को दर्शाता है,अर्थात इसमें अम्ल और क्षार दोनों के रूप में कार्य करने की क्षमता होती है।
इस अम्ल-क्षार अभिक्रिया को निम्न प्रकार से लिखा जा सकता है:
$(H_{2}O_{(l)})_{\text{acid}} + (H_{2}O_{(l)})_{\text{base}} \leftrightarrow (H_{3}O_{(aq)}^{+})_{\text{conjugate acid}} + (OH_{(aq)}^{-})_{\text{conjugate base}}$