(N/A) $\Rightarrow$ जल के अणुओं की ध्रुवीयता के कारण मजबूत संसंजक बल (जल के अणुओं के बीच आकर्षण) और आसंजक बल (जल के अणुओं और जाइलम वाहिकाओं की सतहों के बीच आकर्षण) उत्पन्न होते हैं।
$\Rightarrow$ जल की ऊर्ध्वगामी गति इन गुणों द्वारा सुगम होती है:
$(i)$ संसजन (Cohesion): हाइड्रोजन बंधन के कारण जल के अणुओं के बीच पारस्परिक आकर्षण,जो गुरुत्वाकर्षण के नीचे की ओर खिंचाव का विरोध करता है।
$(ii)$ आसंजन (Adhesion): जल के अणुओं का ट्रैकीड्स और वाहिका तत्वों की ध्रुवीय सतहों के प्रति आकर्षण,जो जल को गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध ऊपर चढ़ने में मदद करता है।
$(iii)$ केशिकत्व (Capillarity): संसजन,आसंजन और पृष्ठ तनाव के संयुक्त प्रभाव के कारण संकीर्ण नलियों (जैसे जाइलम) में जल के ऊपर चढ़ने की क्षमता।
$\Rightarrow$ अंतरा-आणविक हाइड्रोजन बंधन यह सुनिश्चित करता है कि जल एक संसंजक तरल स्तंभ के रूप में बना रहे,जिससे यह वाष्पोत्सर्जन द्वारा उत्पन्न खिंचाव के तहत जाइलम के माध्यम से ऊपर की ओर खींचा जा सके।