(N/A) प्रत्येक गोले का द्रव्यमान,$M = 100 \; kg$।
गोलों के केंद्रों के बीच की दूरी,$r = 1.0 \; m$।
मान लीजिए $X$ गोलों के केंद्रों के बीच का मध्य-बिंदु है।
$1$. $X$ पर गुरुत्वाकर्षण बल:
$X$ पर स्थित किसी पिंड पर प्रत्येक गोले द्वारा लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल परिमाण में समान लेकिन दिशा में विपरीत होता है। इसलिए,$X$ पर कुल गुरुत्वाकर्षण बल $0 \; N$ है।
$2$. $X$ पर गुरुत्वाकर्षण विभव:
$M$ द्रव्यमान से $d$ दूरी पर गुरुत्वाकर्षण विभव $V = -GM/d$ द्वारा दिया जाता है। मध्य-बिंदु $X$ पर,प्रत्येक गोले से दूरी $d = r/2 = 0.5 \; m$ है।
$V_{total} = V_1 + V_2 = -\frac{GM}{r/2} - \frac{GM}{r/2} = -\frac{4GM}{r}$
$V_{total} = -\frac{4 \times 6.67 \times 10^{-11} \times 100}{1.0} = -2.668 \times 10^{-8} \; J/kg \approx -2.67 \times 10^{-8} \; J/kg$।
$3$. संतुलन:
चूंकि कुल बल शून्य है,इसलिए $X$ पर रखा गया पिंड संतुलन की स्थिति में है। यदि पिंड को थोड़ा सा एक गोले की ओर विस्थापित किया जाता है,तो उस गोले से लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल बढ़ जाता है जबकि दूसरे गोले से लगने वाला बल कम हो जाता है। यह विस्थापन की दिशा में एक शुद्ध बल उत्पन्न करता है,जो पिंड को $X$ से और दूर खींचता है। अतः,यह संतुलन अस्थिर है।