(A) समूह-$1$ के तत्वों के सबसे बाहरी कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है और इसलिए उनमें इस इलेक्ट्रॉन को खोने की प्रबल प्रवृत्ति होती है। इन तत्वों की संयोजी इलेक्ट्रॉन खोने की प्रवृत्ति आयनन एन्थैल्पी पर निर्भर करती है। चूंकि समूह में नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी घटती है,इसलिए समूह-$1$ के तत्वों की अभिक्रियाशीलता $Li < Na < K < Rb < Cs$ के क्रम में बढ़ती है।
दूसरी ओर,समूह-$17$ के तत्वों के संयोजी कोश में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं और इसलिए उनमें एक और इलेक्ट्रॉन स्वीकार करने की प्रबल प्रवृत्ति होती है। अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन स्वीकार करने की प्रवृत्ति समूह-$17$ के तत्वों के इलेक्ट्रोड विभव पर निर्भर करती है। समूह-$17$ के तत्वों का इलेक्ट्रोड विभव $F$ से $I$ तक घटता है $(F = +2.86 \ V, Cl = +1.36 \ V, Br = +1.08 \ V, I = +0.53 \ V)$ और इसलिए,उनकी अभिक्रियाशीलता भी $F > Cl > Br > I$ के क्रम में घटती है।