एक प्रेरक (inductor) में धारा $I = (3t + 8) \ A$ द्वारा दी गई है,जहाँ $t$ सेकंड में है। प्रेरक में उत्पन्न प्रेरित emf का परिमाण $12 \ mV$ है। प्रेरक का स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) . . . . . . $mH$ है।

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यदि एक परिनालिका (solenoid) में प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या को तीन गुना कर दिया जाए,तो परिनालिका का स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) हो जाएगा

$r$ त्रिज्या वाली तार की एक कुंडली में $600$ फेरे हैं और इसका स्व-प्रेरकत्व $108 \ mH$ है। समान त्रिज्या और $500$ फेरों वाली कुंडली का स्व-प्रेरकत्व क्या होगा ($mH$ में)?

$Cu$ तार की एक कुंडली (त्रिज्या $r$,स्व-प्रेरकत्व $L$) को मोड़कर दो संकेंद्रित फेरे बनाए जाते हैं,जिनमें से प्रत्येक की त्रिज्या $r/2$ है। नया स्व-प्रेरकत्व क्या होगा?

एक वृत्ताकार कुंडली में,जब फेरों की संख्या दोगुनी कर दी जाती है और प्रतिरोध प्रारंभिक मान का $1/4$ हो जाता है,तो प्रेरकत्व (inductance) ....... गुना हो जाता है।

एक कुंडली (coil) में $0.05 \ s$ में धारा $2 \ A$ से बदलकर $4 \ A$ हो जाती है,जिससे उत्पन्न औसत $e.m.f.$ $8 \ V$ है। कुंडली का स्वप्रेरकत्व (self-inductance) $H$ में क्या है?

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