एक कुंडली में धारा $0$ से $2 \,A$ तक $0.05 \,s$ में बदलती है,जिससे प्रेरित औसत $e.m.f.$ $8 \,V$ उत्पन्न होता है। कुंडली का स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) है:

  • A
    $0.1$
  • B
    $0.2$
  • C
    $0.4$
  • D
    $0.8$

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$5\, cm$ त्रिज्या वाली एक वृत्ताकार कुंडली में तार के $500$ फेरे हैं। कुंडली के स्व-प्रेरण गुणांक का अनुमानित मान क्या होगा?

दो परिनालिकाओं (solenoids) $A$ और $B$ के प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या का अनुपात $1: 3$ है और $A$ तथा $B$ की लंबाई का अनुपात $1: 2$ है। यदि दोनों परिनालिकाओं का अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल समान है,तो परिनालिकाओं $A$ और $B$ के स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) का अनुपात क्या होगा?

$0.4 \, mH$ स्व-प्रेरकत्व वाली कुंडली में बहने वाली धारा $0.1 \, s$ में $250 \, mA$ बढ़ जाती है। प्रेरित $e.m.f.$ होगा:

दो अलग-अलग कुंडलियों का स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) $8 \ mH$ और $2 \ mH$ है। दोनों कुंडलियों में धारा समान स्थिर दर से बढ़ाई जाती है। कुंडलियों में प्रेरित $emf$ का अनुपात क्या है?

एक वृत्ताकार कुंडली में,जब फेरों की संख्या दोगुनी कर दी जाती है और प्रतिरोध प्रारंभिक मान का $1/4$ हो जाता है,तो प्रेरकत्व (inductance) ....... गुना हो जाता है।

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