(N/A) $\Rightarrow$ अपरा (placenta) अंडाशय के भीतर एक नरम,गद्देदार ऊतक है जिससे बीजांड जुड़े होते हैं।
$\Rightarrow$ अंडाशय के भीतर बीजांडों की व्यवस्था को बीजांडन्यास कहा जाता है। बीजांडन्यास के मुख्य प्रकार सीमांत (marginal),अक्षीय (axile),भित्तीय (parietal),मुक्त स्तंभ (free central) और आधारी (basal) हैं।
$\Rightarrow$ सीमांत बीजांडन्यास: इस प्रकार में,अपरा अंडाशय की अधर सीवन (ventral suture) के साथ एक कटक (ridge) बनाता है और बीजांड इस कटक पर दो पंक्तियों में लगे होते हैं,जैसा कि मटर में होता है।
$\Rightarrow$ अक्षीय बीजांडन्यास: इस प्रकार में,अपरा अक्षीय होता है और बीजांड बहुकोष्ठीय अंडाशय में इससे जुड़े होते हैं,जैसा कि गुड़हल,टमाटर और नींबू में होता है।
$\Rightarrow$ भित्तीय बीजांडन्यास: इस प्रकार में,बीजांड अंडाशय की आंतरिक दीवार या परिधीय भाग पर विकसित होते हैं। अंडाशय एककोष्ठीय होता है लेकिन कूटपट्ट (false septum) के निर्माण के कारण यह द्वि-कोष्ठीय हो सकता है,जैसा कि सरसों और आर्जेमोन में होता है।
$\Rightarrow$ मुक्त स्तंभ बीजांडन्यास: इस प्रकार में,बीजांड केंद्रीय अक्ष पर स्थित होते हैं और पट (septa) अनुपस्थित होते हैं,जिससे अंडाशय एककोष्ठीय होता है,जैसा कि डायन्थस और प्रिम्युला में होता है।
$\Rightarrow$ आधारी बीजांडन्यास: इस प्रकार में,अपरा अंडाशय के आधार पर विकसित होता है और एक एकल बीजांड इससे जुड़ा होता है,जैसा कि सूरजमुखी और गेंदे में होता है।