(D) एक बेलनाकार चालक का प्रतिरोध $R$ निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:
$(i)$ लंबाई $(l)$: प्रतिरोध लंबाई के सीधे समानुपाती होता है $(R \propto l)$।
$(ii)$ अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $(A)$: प्रतिरोध अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है $(R \propto 1/A)$।
$(iii)$ पदार्थ की प्रकृति (विशिष्ट प्रतिरोध,$\rho$)।
$(iv)$ तापमान।
जब किसी चालक को खींचकर उसकी लंबाई दोगुनी की जाती है,तो उसका आयतन स्थिर रहता है। यदि मूल लंबाई $l$ है और नई लंबाई $l' = 2l$ है,तो नया अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $A'$ का मान $A/2$ होगा,क्योंकि $V = A \times l = A' \times l'$।
नया प्रतिरोध $R'$ इस प्रकार होगा:
$R' = \rho \times (l' / A') = \rho \times (2l / (A/2)) = 4 \times (\rho \times l / A) = 4R$।
अतः,प्रतिरोध मूल प्रतिरोध का $4$ गुना हो जाएगा।