(N/A) $\rightarrow$ सुप्त बीज एक निश्चित समय अवधि के लिए अंकुरित नहीं होते हैं। यह अवधि कुछ दिनों से लेकर महीनों तक हो सकती है,और इस निश्चित समय को $\text{सुप्तावस्था अवधि}$ कहा जाता है।
$\rightarrow$ $\text{सुप्तावस्था के कारण}$:
$(a)$ $\text{अभेद्य बीज आवरण}$: कई पौधों में बीज आवरण पानी (जैसे,$\text{Chenopodium}$,$\text{Trigonella}$,$\text{Melilotus}$),ऑक्सीजन (जैसे,$\text{Brassica alba}$,$\text{Pyrus malus}$) या रसायनों (जैसे,$\text{Xanthium}$) के लिए अभेद्य होता है।
$(b)$ $\text{यांत्रिक अवरोध}$: कुछ पौधों में बीज आवरण बहुत कठोर होता है,जो भ्रूण के विकास में यांत्रिक बाधा उत्पन्न करता है (जैसे,$\text{Capsella}$,$\text{Lepidium}$)।
$(c)$ $\text{रासायनिक अवरोधक}$: कुछ बीज $\text{Abscisic acid (ABA)}$,फेनोलिक एसिड,कौमारिन या छोटी श्रृंखला वाले फैटी एसिड जैसे अवरोधक उत्पन्न करते हैं जो अंकुरण को रोकते हैं। ये फल (जैसे,टमाटर के रस में $\text{Ferulic acid}$),भ्रूणपोष (जैसे,$\text{Xanthium}$) या बीज आवरण (जैसे,$\text{Cucurbita}$) में मौजूद हो सकते हैं।
$(d)$ $\text{अपरिपक्व भ्रूण}$: गेहूं,जौ और जई जैसे बीजों को परिपक्व होने और अंकुरण की क्षमता प्राप्त करने के लिए विश्राम की अवधि की आवश्यकता होती है। इस दौरान वे आवश्यक हार्मोन का संश्लेषण करते हैं।
$\rightarrow$ $\text{सुप्तावस्था तोड़ने के तरीके}$:
$(1)$ $\text{तापमान उपचार}$: वृद्धि अवरोधकों को निष्क्रिय करने के लिए गर्मी या ठंड का उपयोग।
$(2)$ $\text{यांत्रिक विधि}$: कठोर बीज आवरण को यांत्रिक रूप से घिसकर कमजोर करना।
$(3)$ $\text{जैविक क्रिया}$: मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव कठोर बीज आवरण का अपघटन करके उसे कमजोर करते हैं।
$(4)$ $\text{लीचिंग}$: बारिश या सिंचाई के पानी द्वारा अवरोधकों को हटाना।
$(5)$ $\text{परिपक्वता}$: भ्रूण को परिपक्व होने के लिए पर्याप्त समय देना।