अदरक को जड़ के बजाय तना माना जाता है क्योंकि इसमें निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं:
$1$. पर्व और पर्वसंधियों की उपस्थिति: अदरक में स्पष्ट पर्व (internodes) और पर्वसंधियां (nodes) होती हैं,जो तने की मुख्य विशेषताएं हैं। जड़ों में पर्व या पर्वसंधियां नहीं होती हैं।
$2$. कलिकाओं की उपस्थिति: अदरक की पर्वसंधियों पर कलिकाएं (कक्षस्थ कलिकाएं) होती हैं,जिनसे नए वायवीय तने विकसित हो सकते हैं। जड़ों में ऐसी कलिकाओं का अभाव होता है।
$3$. अपस्थानिक जड़ें: अदरक के प्रकंद से उगने वाली जड़ें अपस्थानिक जड़ें होती हैं,जो तने की पर्वसंधियों से निकलती हैं,न कि मूलांकुर से।
$4$. कार्य: जबकि जड़ें मुख्य रूप से पौधों को स्थिर रखने और अवशोषण का कार्य करती हैं,अदरक का प्रकंद भोजन के भंडारण के अंग के रूप में कार्य करता है,जो भूमिगत तनों का एक सामान्य रूपांतरण है।