(N/A) संक्रमण तत्वों की अभिक्रियाशीलता मुख्य रूप से उनके इलेक्ट्रॉन खोने की क्षमता द्वारा निर्धारित होती है,जो उनकी आयनन एन्थैल्पी से संबंधित है।
$3d$ श्रेणी में $Sc$ $(Z=21)$ से $Cu$ $(Z=29)$ की ओर जाने पर,$d$-इलेक्ट्रॉनों द्वारा खराब परिरक्षण (shielding) के कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है।
इससे प्रथम और द्वितीय आयनन एन्थैल्पी में वृद्धि होती है।
परिणामस्वरूप,इलेक्ट्रॉन खोने की प्रवृत्ति कम हो जाती है,जिससे तत्व कम अभिक्रियाशील हो जाते हैं।
इसके अतिरिक्त,परमाणुकरण एन्थैल्पी में वृद्धि (जैसे $Cr$ तक अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने से धात्विक बंधन मजबूत होता है) भी अभिक्रियाशीलता में कमी लाने में योगदान देती है।