(N/A) श्रेणी $LCR$ परिपथ में,किसी भी क्षण सभी घटकों से प्रवाहित धारा $I$ समान होती है।
माना धारा $I = I_m \sin(\omega t)$ है।
प्रतिरोधक के सिरों पर वोल्टेज $V_R$,धारा $I$ के साथ समान कला (in phase) में होता है।
प्रेरक (inductor) के सिरों पर वोल्टेज $V_L$,धारा $I$ से $\pi/2$ आगे होता है।
संधारित्र (capacitor) के सिरों पर वोल्टेज $V_C$,धारा $I$ से $\pi/2$ पीछे होता है।
कुल वोल्टेज $V$,$V_R$,$V_L$ और $V_C$ का फेजर योग है। चूंकि $V_L$ और $V_C$ विपरीत दिशाओं में हैं,उनका परिणामी $(V_L - V_C)$ होता है।
फेजर आरेख का उपयोग करते हुए,परिणामी वोल्टेज $V = \sqrt{V_R^2 + (V_L - V_C)^2}$ प्राप्त होता है।
स्रोत वोल्टेज और धारा के बीच कला कोण $\phi$,$\tan \phi = \frac{V_L - V_C}{V_R} = \frac{I_m X_L - I_m X_C}{I_m R} = \frac{X_L - X_C}{R}$ द्वारा दिया जाता है।
अतः,कला संबंध $\phi = \tan^{-1} \left( \frac{X_L - X_C}{R} \right)$ है।