(N/A) $\Rightarrow$ जूलियस वॉन सैक्स,एक प्रमुख जर्मन वनस्पतिशास्त्री,ने पहली बार प्रदर्शित किया कि पौधों को एक परिभाषित पोषक घोल में परिपक्वता तक उगाया जा सकता है।
$\Rightarrow$ पोषक घोल में पौधों को उगाने की तकनीक को हाइड्रोपोनिक्स (जल संवर्धन) कहा जाता है।
$\Rightarrow$ तब से,पौधों के लिए आवश्यक खनिज पोषक तत्वों को निर्धारित करने के लिए कई सुधरी हुई विधियों का उपयोग किया गया है।
$\Rightarrow$ इन सभी विधियों का सार पौधों को मृदा-रहित,परिभाषित खनिज घोल में संवर्धित करना है।
$\Rightarrow$ इन विधियों के लिए शुद्ध जल और खनिज पोषक लवणों की आवश्यकता होती है।
$\Rightarrow$ प्रयोगों की एक श्रृंखला के बाद,जिसमें पौधों की जड़ों को पोषक घोल में डुबोया गया था और जिसमें एक तत्व को जोड़ा/हटाया गया था या विभिन्न सांद्रता में दिया गया था,पादप वृद्धि के लिए उपयुक्त खनिज घोल प्राप्त किया गया था।
$\Rightarrow$ इस विधि द्वारा आवश्यक तत्वों की पहचान की गई और उनके न्यूनता लक्षणों की खोज की गई।
$\Rightarrow$ हाइड्रोपोनिक्स का उपयोग टमाटर,बीज रहित खीरा और सलाद पत्ता (लेट्यूस) जैसी सब्जियों के व्यावसायिक उत्पादन के लिए एक तकनीक के रूप में सफलतापूर्वक किया गया है।
$\Rightarrow$ इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि इष्टतम वृद्धि प्राप्त करने के लिए पोषक घोलों को पर्याप्त रूप से वातित (aerated) किया जाना चाहिए।