(N/A) $1$. समांतर संयोजन:
तुल्य प्रतिरोध $R_p$ का सूत्र $\frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \dots + \frac{1}{R_n}$ है।
चूंकि प्रत्येक $R_i \ge R_{\min}$,इसलिए $\frac{1}{R_i} \le \frac{1}{R_{\min}}$ होगा।
अतः,$\frac{1}{R_p} = \sum_{i=1}^n \frac{1}{R_i} > \frac{1}{R_{\min}}$ ($n$ पदों के कारण)।
इसलिए,$R_p < R_{\min}$।
भौतिक व्याख्या: समांतर क्रम में,धारा को बहने के लिए कई रास्ते मिलते हैं,जिससे कुल प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम हो जाता है।
$2$. श्रेणी संयोजन:
तुल्य प्रतिरोध $R_s$ का सूत्र $R_s = R_1 + R_2 + \dots + R_n$ है।
चूंकि प्रत्येक $R_i > 0$ है और $R_{\max}$ एक पद है,इसलिए $R_s = R_{\max} + \sum_{i \neq \max} R_i$।
यहाँ $\sum_{i \neq \max} R_i > 0$ होने के कारण,$R_s > R_{\max}$ प्राप्त होता है।
भौतिक व्याख्या: श्रेणी क्रम में,धारा को प्रत्येक प्रतिरोध से होकर गुजरना पड़ता है,इसलिए कुल प्रतिरोध सभी व्यक्तिगत प्रतिरोधों का योग होता है,जो अनिवार्य रूप से किसी भी एक प्रतिरोध से अधिक होता है।