(A) $CH_3-CH_2-CH=CH-CH_3$ (पेंट-$2$-ईन) की $HCl$ के साथ अभिक्रिया एक इलेक्ट्रॉनस्नेही योगज अभिक्रिया है।
यह अभिक्रिया कार्बधनायन मध्यवर्ती के निर्माण के माध्यम से आगे बढ़ती है।
$1$. $H^+$ द्वारा द्वि-आबंध का प्रोटोनीकरण दो संभावित कार्बधनायन बनाता है:
- $CH_3-CH_2-CH^+-CH_2-CH_3$ (एक द्वितीयक कार्बधनायन)।
- $CH_3-CH_2-CH_2-CH^+-CH_3$ (यह भी एक द्वितीयक कार्बधनायन है,लेकिन प्रोपिल समूह के प्रेरणिक प्रभाव के कारण अधिक स्थायी है)।
$2$. इन कार्बधनायनों पर क्लोराइड आयन $(Cl^-)$ के आक्रमण से उत्पाद प्राप्त होते हैं:
- अधिक स्थायी कार्बधनायन पर आक्रमण से $CH_3-CH_2-CH_2-CHCl-CH_3$ ($2$-क्लोरोपेंटेन) प्राप्त होता है,जो मुख्य उत्पाद $(A)$ है।
- दूसरे कार्बधनायन पर आक्रमण से $CH_3-CH_2-CHCl-CH_2-CH_3$ ($3$-क्लोरोपेंटेन) प्राप्त होता है,जो गौण उत्पाद $(B)$ है।