(N/A) $(1)$ अग्न्याशय में स्थित लैंगरहैंस के द्वीप समूह (Islets of Langerhans) ग्लूकागन और इंसुलिन जैसे हार्मोन का स्राव करते हैं। ये हार्मोन रक्त द्वारा अपने लक्ष्य अंगों तक पहुँचाए जाते हैं,जिससे यह एक नलिकाविहीन अंतःस्रावी ग्रंथि बन जाती है। साथ ही,अग्न्याशय अग्न्याशयी रस का स्राव करता है जिसमें विभिन्न पाचक एंजाइम होते हैं,जो अग्न्याशयी नलिका के माध्यम से ग्रहणी (duodenum) तक पहुँचते हैं। इस प्रकार,यह एक बहिःस्रावी ग्रंथि के रूप में कार्य करता है।
$(2)$ यकृत पित्त रस का स्राव करता है,जिसमें $Na_{2}CO_{3}$ और $NaHCO_{3}$ जैसे अकार्बनिक लवण होते हैं। ये लवण ग्रहणी में क्षारीय माध्यम प्रदान करते हैं,जो अग्न्याशयी एंजाइमों को सक्रिय करने के लिए आवश्यक है। इसके अतिरिक्त,पित्त रस में सोडियम टॉरोकोलेट और सोडियम ग्लाइकोकोलेट जैसे कार्बनिक लवण होते हैं,जो वसा के पायसीकरण (emulsification) और पाचन में मदद करते हैं। इसलिए,हालांकि यकृत पाचक एंजाइमों का स्राव नहीं करता है,फिर भी यह पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है,जिससे यह एक महत्वपूर्ण सहायक पाचक ग्रंथि बन जाता है।