(N/A) $(I)$ व्यावसायिक विरचन: व्यावसायिक रूप से डाइनाइट्रोजन का उत्पादन वायु के द्रवीकरण और प्रभाजी आसवन द्वारा किया जाता है। द्रव डाइनाइट्रोजन (क्वथनांक $77.2 \ K$) पहले आसवित हो जाता है,जबकि द्रव ऑक्सीजन (क्वथनांक $90 \ K$) पीछे रह जाती है।
$(II)$ प्रयोगशाला विरचन: प्रयोगशाला में,डाइनाइट्रोजन को अमोनियम क्लोराइड के जलीय विलयन की सोडियम नाइट्राइट के साथ अभिक्रिया कराकर तैयार किया जाता है।
$NH_{4}Cl_{(aq)} + NaNO_{2(aq)} \rightarrow NaCl_{(aq)} + N_{2(g)} + 2H_{2}O_{(l)}$
इस अभिक्रिया में अल्प मात्रा में $NO$ और $HNO_{3}$ भी बनते हैं; इन अशुद्धियों को पोटेशियम डाइक्रोमेट युक्त जलीय सल्फ्यूरिक अम्ल से गैस को गुजार कर दूर किया जा सकता है।
$(III)$ तापीय अपघटन द्वारा: अमोनियम डाइक्रोमेट और धातु एज़ाइड जैसे $Ba(N_{3})_{2}$ या $NaN_{3}$ के तापीय अपघटन से नाइट्रोजन प्राप्त होता है।
$(NH_{4})_{2}Cr_{2}O_{7} \xrightarrow{\Delta} N_{2} + 4H_{2}O + Cr_{2}O_{3}$
$Ba(N_{3})_{2} \xrightarrow{\Delta} Ba + 3N_{2(g)}$
$2NaN_{3} \xrightarrow{\Delta} 2Na + 3N_{2(g)}$
धातु एज़ाइड से बहुत शुद्ध डाइनाइट्रोजन प्राप्त होता है।