(N/A) परिणामी तरंग का आयाम दो घटक तरंगों के बीच के कलांतर $\phi$ का एक फलन है।
परिणामी आयाम $A$ का सूत्र है: $A(\phi) = 2a \cos(\frac{\phi}{2})$,जहाँ $a$ प्रत्येक व्यक्तिगत तरंग का आयाम है।
$1$. जब दो तरंगें समान कला में होती हैं,तो कलांतर $\phi = 0$ होता है। इस मान को सूत्र में रखने पर,हमें $A = 2a \cos(0) = 2a$ प्राप्त होता है। यह अधिकतम संभव आयाम है,जिसे संपोषी व्यतिकरण कहा जाता है।
$2$. जब दो तरंगें पूरी तरह से विपरीत कला में होती हैं,तो कलांतर $\phi = \pi$ होता है। इस मान को सूत्र में रखने पर,हमें $A = 2a \cos(\frac{\pi}{2}) = 0$ प्राप्त होता है। इसके परिणामस्वरूप शून्य आयाम मिलता है,जिसे विनाशी व्यतिकरण कहा जाता है।
$3$. किसी अन्य कलांतर के लिए,परिणामी आयाम $A$ का मान $0 \leq A \leq 2a$ की सीमा में होगा।