(N/A) प्राकृतिक विधियाँ डिंब (ovum) और शुक्राणु (sperm) के मिलन की संभावनाओं को टालने के सिद्धांत पर कार्य करती हैं,जो इस प्रकार हैं:
$(i)$ आवधिक संयम (Periodic abstinence): इस विधि में,जोड़े मासिक धर्म चक्र के $10$ वें से $17$ वें दिन तक संभोग करने से बचते हैं या परहेज करते हैं,जब अंडोत्सर्ग (ovulation) होने की संभावना होती है। चूंकि इस अवधि के दौरान निषेचन की संभावना बहुत अधिक होती है,इसलिए इसे फर्टाइल पीरियड कहा जाता है। इसलिए,इस अवधि के दौरान संभोग से परहेज करके गर्भधारण को रोका जा सकता है।
$(ii)$ बाह्य स्खलन (Coitus interruptus): इस विधि में,पुरुष साथी वीर्यसेचन से बचने के लिए संभोग के दौरान स्खलन से ठीक पहले अपने लिंग को योनि से बाहर निकाल लेता है।
$(iii)$ दुग्धस्रवण अर्तवहीनता (Lactational amenorrhea): यह विधि इस तथ्य पर आधारित है कि प्रसव के बाद तीव्र स्तनपान की अवधि के दौरान अंडोत्सर्ग और मासिक धर्म चक्र नहीं होता है। इसलिए,जब तक माँ बच्चे को पूरी तरह से स्तनपान कराती है,तब तक गर्भधारण की संभावना लगभग शून्य होती है। यह विधि प्रसव के बाद अधिकतम छह महीने की अवधि तक ही प्रभावी मानी गई है।
चूंकि इन विधियों में किसी भी दवा या उपकरण का उपयोग नहीं किया जाता है,इसलिए दुष्प्रभाव लगभग शून्य होते हैं। हालाँकि,इन विधियों में विफलता की संभावना भी अधिक होती है।