(A) मधुमक्खी पालन या एपिकल्चर शहद के उत्पादन के लिए मधुमक्खियों के छत्तों का रखरखाव है। यह एक प्राचीन कुटीर उद्योग रहा है।
शहद उच्च पोषक मूल्य वाला भोजन है और इसका उपयोग स्वदेशी चिकित्सा प्रणालियों में भी किया जाता है। मधुमक्खी मोम (beeswax) भी पैदा करती है जिसका उपयोग उद्योग में कई तरह से किया जाता है,जैसे कि सौंदर्य प्रसाधन और विभिन्न प्रकार के पॉलिश तैयार करने में।
शहद की बढ़ती मांग के कारण बड़े पैमाने पर मधुमक्खी पालन की प्रथाएं शुरू हुई हैं।
मधुमक्खी पालन किसी भी ऐसे क्षेत्र में किया जा सकता है जहाँ कुछ जंगली झाड़ियों,फलों के बगीचों और खेती वाली फसलों के पर्याप्त चरागाह हों।
मधुमक्खियों की कई प्रजातियाँ हैं जिन्हें पाला जा सकता है। इनमें से सबसे सामान्य प्रजाति $Apis \text{ } indica$ है।
मधुमक्खी के छत्तों को घर के आंगन में,बरामदे में या छत पर भी रखा जा सकता है। मधुमक्खी पालन श्रम-गहन नहीं है।
मधुमक्खी पालन,हालांकि अपेक्षाकृत आसान है,लेकिन इसके लिए कुछ विशेष ज्ञान की आवश्यकता होती है और कई संगठन मधुमक्खी पालन सिखाते हैं।
सफल मधुमक्खी पालन के लिए निम्नलिखित बिंदु महत्वपूर्ण हैं: $(i)$ मधुमक्खियों की प्रकृति और आदतों का ज्ञान,$(ii)$ छत्तों को रखने के लिए उपयुक्त स्थान का चयन,$(iii)$ मधुमक्खियों के झुंड को पकड़ना और छत्ते में रखना,$(iv)$ विभिन्न मौसमों के दौरान छत्तों का प्रबंधन और $(v)$ शहद और मोम का रखरखाव और संग्रह।
मधुमक्खियाँ हमारी कई फसलों जैसे सूरजमुखी,$Brassica$,सेब और नाशपाती की परागणकर्ता (pollinators) हैं।