(N/A) पारिस्थितिक तंत्र को प्रकृति की एक कार्यात्मक इकाई के रूप में देखा जा सकता है जहाँ जीवित जीव आपस में और अपने आसपास के भौतिक पर्यावरण के साथ परस्पर क्रिया करते हैं।
पारिस्थितिक तंत्र आकार में बहुत भिन्न होते हैं,एक छोटे तालाब से लेकर एक बड़े जंगल या समुद्र तक।
कई पारिस्थितिकी विज्ञानी पूरे जीवमंडल को एक वैश्विक पारिस्थितिक तंत्र मानते हैं,जो पृथ्वी पर सभी स्थानीय पारिस्थितिक तंत्रों का एक संयोजन है।
चूंकि यह प्रणाली बहुत बड़ी और जटिल है,इसलिए इसे दो बुनियादी श्रेणियों में विभाजित करना सुविधाजनक है: स्थलीय (terrestrial) और जलीय (aquatic)।
स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र के उदाहरणों में जंगल,घास के मैदान और रेगिस्तान शामिल हैं।
जलीय पारिस्थितिक तंत्र के उदाहरणों में तालाब,झील,आर्द्रभूमि (wetland),नदियाँ और मुहाने (estuaries) शामिल हैं।
फसलों के खेत और एक्वेरियम को मानव-निर्मित (कृत्रिम) पारिस्थितिक तंत्र के रूप में भी माना जा सकता है।
पारिस्थितिक तंत्र की संरचना का अध्ययन करने से हमें इनपुट (उत्पादकता),ऊर्जा का स्थानांतरण (खाद्य श्रृंखला/जाल,पोषक चक्र) और आउटपुट (क्षरण और ऊर्जा की हानि) को समझने में मदद मिलती है,साथ ही इन ऊर्जा प्रवाहों द्वारा निर्मित संबंधों और चक्रों को समझने में भी मदद मिलती है।