(N/A) वृक्क (kidney) के भीतर कार्य करने वाली प्रतिधारा क्रियाविधि जल के संरक्षण के लिए मुख्य अनुकूलन है।
वृक्क के भीतर दो प्रकार की प्रतिधारा क्रियाविधियाँ होती हैं: हेनले का लूप (Henle's loop) और वासा रेक्टा (vasa recta)।
हेनले का लूप नेफ्रॉन का एक $U$-आकार का भाग है। नलिका की दो भुजाओं में रक्त विपरीत दिशाओं में बहता है,जिससे प्रतिधारा उत्पन्न होती है।
वासा रेक्टा एक सूक्ष्म केशिका जाल है जो हेनले के लूप के समानांतर चलता है और यह भी $U$-आकार का होता है।
वासा रेक्टा की दो भुजाओं में रक्त विपरीत दिशाओं में बहता है। परिणामस्वरूप,अवरोही भुजा में वृक्क मज्जा (renal medulla) में प्रवेश करने वाला रक्त,आरोही भुजा में बाहर निकलने वाले रक्त के निकट संपर्क में आता है।
प्रतिधारा क्रियाविधि के कारण परासरण सांद्रता (osmolarity) कॉर्टेक्स में $300 \, mOsmol \, L^{-1}$ से बढ़कर आंतरिक मज्जा में $1200 \, mOsmol \, L^{-1}$ हो जाती है।
यह सांद्रता प्रवणता (concentration gradient) को बनाए रखने में मदद करता है,जो संग्राहक नलिकाओं से पानी की आसान आवाजाही में सहायक है।
यह प्रवणता मुख्य रूप से $NaCl$ और यूरिया की गति का परिणाम है।