(N/A) ऊष्मा धारिता $(C)$ को किसी वस्तु के तापमान को $1 \ K$ (या $1 \ ^\circ C$) तक बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा ऊर्जा की मात्रा के रूप में परिभाषित किया जाता है।
गणितीय रूप से, $C = \frac{Q}{\Delta T}$, जहाँ $Q$ ऊष्मा ऊर्जा है और $\Delta T$ तापमान में परिवर्तन है।
$1$. $SI$ मात्रक: चूँकि ऊष्मा ऊर्जा $(Q)$ को जूल $(J)$ में मापा जाता है और तापमान $(\Delta T)$ को केल्विन $(K)$ में, इसलिए ऊष्मा धारिता का $SI$ मात्रक $J/K$ या $J \cdot K^{-1}$ है।
$2$. विमीय सूत्र: ऊष्मा ऊर्जा $(Q)$ की विमा $[ML^2T^{-2}]$ है और तापमान $(\Delta T)$ की विमा $[K]$ है।
अतः, ऊष्मा धारिता का विमीय सूत्र $\frac{[ML^2T^{-2}]}{[K]} = [ML^2T^{-2}K^{-1}]$ है।