(N/A) नाभिकीय त्रिज्या का व्यंजक इस प्रकार है:
$R = R_{0} A^{1/3}$
जहाँ $R_{0}$ एक स्थिरांक है और $A$ द्रव्यमान संख्या है।
नाभिकीय पदार्थ का घनत्व $\rho$ नाभिक के द्रव्यमान और उसके आयतन के अनुपात के रूप में परिभाषित होता है:
$\rho = \frac{\text{नाभिक का द्रव्यमान}}{\text{नाभिक का आयतन}}$
मान लीजिए $m$ एक न्यूक्लियॉन का औसत द्रव्यमान है। नाभिक का कुल द्रव्यमान लगभग $m \times A$ होता है।
नाभिक को गोलाकार मानते हुए,इसका आयतन $V = \frac{4}{3} \pi R^{3}$ होता है।
$R$ का व्यंजक प्रतिस्थापित करने पर:
$\rho = \frac{mA}{\frac{4}{3} \pi (R_{0} A^{1/3})^{3}}$
$\rho = \frac{mA}{\frac{4}{3} \pi R_{0}^{3} A}$
अंश और हर से $A$ को काटने पर:
$\rho = \frac{3m}{4 \pi R_{0}^{3}}$
चूंकि $m$,$\pi$,और $R_{0}$ स्थिरांक हैं,इसलिए नाभिकीय घनत्व $\rho$ द्रव्यमान संख्या $A$ से स्वतंत्र है और लगभग स्थिर है।