(N/A) $(i)$ $Fe^{3+} / Fe^{2+}$ के लिए ${E^{\Theta}}$ मान $+0.8 \ V$ है,जो $Cr^{3+} / Cr^{2+}$ $(-0.4 \ V)$ से अधिक है और $Mn^{3+} / Mn^{2+}$ $(+1.5 \ V)$ से कम है।
उच्च अपचयन विभव का अर्थ है आसान अपचयन,इसलिए $Mn^{3+}$ का $Mn^{2+}$ में अपचयन सबसे आसानी से होता है,उसके बाद $Fe^{3+}$ आता है,और $Cr^{3+}$ का अपचयन सबसे कठिन है।
अतः,अम्लीय विलयन में इन आयनों की स्थिरता का क्रम: $Mn^{3+} < Fe^{3+} < Cr^{3+}$ है।
$(ii)$ $M^{2+} / M$ युग्मों के लिए अपचयन विभव: $Mn^{2+} / Mn$ $(-1.2 \ V)$,$Cr^{2+} / Cr$ $(-0.9 \ V)$,और $Fe^{2+} / Fe$ $(-0.4 \ V)$ हैं।
कम अपचयन विभव का अर्थ है धातु का अपने $M^{2+}$ आयन में ऑक्सीकरण आसानी से होना।
चूंकि अपचयन विभव के मान $Mn^{2+} / Mn < Cr^{2+} / Cr < Fe^{2+} / Fe$ क्रम में हैं,इसलिए ऑक्सीकरण की सुगमता का क्रम: $Fe < Cr < Mn$ है।