(N/A) $-OH$ समूह एक इलेक्ट्रॉन-दाता समूह है जो निम्नलिखित कारणों से बेंजीन वलय को इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति सक्रिय करता है:
$(a)$ अनुनाद प्रभाव: $-OH$ समूह के ऑक्सीजन परमाणु पर मौजूद एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म अनुनाद के माध्यम से बेंजीन वलय में विस्थानीकृत हो जाते हैं। इससे वलय की ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है,जिससे वे इलेक्ट्रॉनरागी (electrophiles) द्वारा आक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
$(b)$ प्रेरणिक प्रभाव: ऑक्सीजन परमाणु कार्बन की तुलना में अधिक विद्युत ऋणात्मक होता है,जो $-I$ प्रभाव डालता है और इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर खींचता है। हालाँकि,$-OH$ समूह का $+R$ (अनुनाद) प्रभाव उसके $-I$ प्रभाव से कहीं अधिक शक्तिशाली होता है।
निष्कर्ष: चूंकि अनुनाद प्रभाव प्रभावी होता है,इसलिए फिनोल के बेंजीन वलय में कुल इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है,विशेष रूप से ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर। परिणामस्वरूप,फिनोल इलेक्ट्रॉनरागी एरोमैटिक प्रतिस्थापन के प्रति बेंजीन की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होता है और $-OH$ समूह एक सक्रियक समूह के रूप में कार्य करता है।