(N/A) $(i)$ ठोस-द्रव संतुलन: $1 \ atm$ $(1.013 \ bar)$ पर केवल एक ही तापमान (गलनांक) होता है जिस पर दोनों अवस्थाएं सह-अस्तित्व में रह सकती हैं। यदि परिवेश के साथ ऊष्मा का आदान-प्रदान न हो,तो दोनों अवस्थाओं का द्रव्यमान स्थिर रहता है।
$H_{2}O_{(s)} \rightleftharpoons H_{2}O_{(l)}$
निष्कर्ष: स्थिर दाब पर गलनांक निश्चित होता है।
$(ii)$ द्रव-वाष्प संतुलन: एक निश्चित तापमान पर,बंद पात्र में द्रव और उसकी वाष्प के बीच वाष्प दाब स्थिर रहता है।
$H_{2}O_{(l)} \rightleftharpoons H_{2}O_{(g)}$
निष्कर्ष: स्थिर तापमान पर,बंद पात्र में $p_{H_{2}O}$ स्थिर रहता है।
$(iii)$ ठोस-गैस संतुलन: बंद पात्र में,स्थिर तापमान पर ठोस और वाष्प के बीच संतुलन होता है। इस प्रक्रिया को ऊर्ध्वपातन कहा जाता है।
$NH_{4}Cl_{(s)} \rightleftharpoons NH_{4}Cl_{(g)}$
निष्कर्ष: स्थिर तापमान पर बंद पात्र में ठोस और वाष्प का द्रव्यमान स्थिर रहता है।
$(iv)$ ठोस का द्रव में घुलना: स्थिर तापमान पर,ठोस का संतृप्त विलयन ठोस-द्रव संतुलन को दर्शाता है जहाँ विलेयता स्थिर रहती है।
$\text{Solute}_{(s)} \rightleftharpoons \text{Solute}_{(aq)}$ ; $\text{Sugar}_{(s)} \rightleftharpoons \text{Sugar}_{(aq)}$
निष्कर्ष: दिए गए तापमान पर विलयन में विलेय की सांद्रता स्थिर रहती है।
$(v)$ गैस का द्रव में घुलना: स्थिर तापमान पर बंद पात्र में,गैस के संतृप्त विलयन में घुली हुई गैस और मुक्त गैस के बीच संतुलन स्थापित होता है। द्रव में गैस की सांद्रता गैस के दाब के सीधे आनुपातिक होती है।
$\text{Gas}_{(g)} \rightleftharpoons \text{Gas}_{(aq)}$ ; $CO_{2(g)} \rightleftharpoons CO_{2(aq)}$
निष्कर्ष: दिए गए तापमान पर $\frac{[\text{Gas}_{(aq)}]}{[\text{Gas}_{(g)}]}$ का अनुपात स्थिर रहता है।