(N/A) अभिकारक और उत्पाद के अनुपात के आधार पर साम्यावस्था के $3$ प्रकार होते हैं:
$(i)$ अभिकारक नगण्य और उत्पाद अधिकतम: ऐसी अभिक्रियाएं पूर्णता की ओर बढ़ती हैं। साम्यावस्था पर,अभिकारक की सांद्रता नगण्य होती है। साम्यावस्था पर लगभग $100 \%$ उत्पाद मौजूद होता है,जहाँ $K > 10^{3}$ होता है।
उदाहरण: $H_{2(g)} + \frac{1}{2} O_{2(g)} \xrightarrow{500 \ K} H_{2}O_{(g)}$; $K_{c} = 2.4 \times 10^{47}$.
$(ii)$ अभिकारक अधिक और उत्पाद कम: ऐसी अभिक्रियाओं में,साम्यावस्था पर अधिकांश अभिकारक अप्रयुक्त रहता है। उत्पाद की सांद्रता बहुत कम होती है। इसका साम्य स्थिरांक बहुत छोटा होता है,अर्थात $K < 10^{-3}$। ऐसी अभिक्रियाएं शायद ही अग्र दिशा में आगे बढ़ती हैं।
उदाहरण: $H_{2}O_{(g)} \xrightarrow{500 \ K} H_{2(g)} + \frac{1}{2} O_{2(g)}$; $K_{c} = 4.1 \times 10^{-48}$.
$(iii)$ अभिकारक और उत्पाद तुलनीय: ऐसी अभिक्रियाओं में,साम्यावस्था पर अभिकारक और उत्पाद दोनों महत्वपूर्ण मात्रा में मौजूद होते हैं। ऐसी अभिक्रियाओं में $K_{c}$ का मान $10^{-3}$ से $10^{3}$ के बीच होता है।
उदाहरण: $H_{2(g)} + I_{2(g)} \xrightarrow{700 \ K} 2 HI_{(g)}$; $K_{c} = 57$.