(N/A) गैल्वेनोमीटर का सीधे एमीटर के रूप में उपयोग करने से दो मुख्य कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं: $(1)$ गैल्वेनोमीटर का प्रतिरोध बहुत अधिक होता है,जो परिपथ के कुल प्रतिरोध को बदल देता है और इस प्रकार मापी जाने वाली धारा बदल जाती है। $(2)$ गैल्वेनोमीटर एक संवेदनशील उपकरण है और उच्च धारा के कारण क्षतिग्रस्त हो सकता है।
इन कठिनाइयों को दूर करने के लिए,गैल्वेनोमीटर के साथ समानांतर क्रम में एक छोटा प्रतिरोध जोड़ा जाता है,जिसे शंट $(r_{s})$ कहा जाता है।
$(i)$ चूंकि शंट का प्रतिरोध $(r_{s})$ गैल्वेनोमीटर के प्रतिरोध $(R_{G})$ की तुलना में बहुत कम होता है,इसलिए अधिकांश धारा शंट से होकर गुजरती है,जिससे गैल्वेनोमीटर को क्षति से बचाया जा सकता है।
$(ii)$ समानांतर संयोजन का तुल्यांकी प्रतिरोध $R_{eq} = \frac{R_{G} r_{s}}{R_{G} + r_{s}}$ होता है। चूंकि $R_{G} \gg r_{s}$,हम $R_{G} + r_{s} \approx R_{G}$ मान सकते हैं। इसलिए,$R_{eq} \approx \frac{R_{G} r_{s}}{R_{G}} = r_{s}$।
$r_{s}$ का मान बहुत कम होने के कारण,परिपथ का कुल प्रतिरोध लगभग अपरिवर्तित रहता है,जिससे यह सुनिश्चित होता है कि एमीटर को जोड़ने से परिपथ की मूल धारा में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं होता है।