(N/A) एकसमान विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ में रखे गए द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा $U$ का सूत्र $U = -\vec{p} \cdot \vec{E} = -pE \cos \theta$ है,जहाँ $\theta$ द्विध्रुव आघूर्ण $\vec{p}$ और विद्युत क्षेत्र $\vec{E}$ के बीच का कोण है।
$(i)$ स्थायी संतुलन: जब $\vec{p}$,$\vec{E}$ के समानांतर होता है,तो $\theta = 0^{\circ}$ होता है।
$U = -pE \cos(0^{\circ}) = -pE$। यह न्यूनतम स्थितिज ऊर्जा की अवस्था है,जो स्थायी संतुलन को दर्शाती है।
(ii) अस्थायी संतुलन: जब $\vec{p}$,$\vec{E}$ के प्रति-समानांतर होता है,तो $\theta = 180^{\circ}$ होता है।
$U = -pE \cos(180^{\circ}) = pE$। यह अधिकतम स्थितिज ऊर्जा की अवस्था है,जो अस्थायी संतुलन को दर्शाती है।
(iii) शून्य स्थितिज ऊर्जा: जब $\vec{p}$,$\vec{E}$ के लंबवत होता है,तो $\theta = 90^{\circ}$ होता है।
$U = -pE \cos(90^{\circ}) = 0$। यह उस अवस्था को दर्शाता है जहाँ द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा शून्य होती है।