(N/A) जल में आयनिक ठोसों की विलेयता काफी भिन्न होती है।
कुछ आयनिक ठोस,जैसे $CaF_2$,अत्यधिक विलेय होते हैं,जबकि $LiF$ (लिथियम फ्लोराइड) जैसे अन्य पदार्थों की विलेयता बहुत कम होती है और उन्हें अविलेय माना जाता है। लवण की विलेयता मुख्य रूप से दो कारकों पर निर्भर करती है:
$(i)$ लवण की जालक एन्थैल्पी (Lattice enthalpy): यह एक मोल ठोस लवण को उसके घटक आयनों में तोड़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा है। जालक एन्थैल्पी जितनी अधिक होगी,क्रिस्टल जालक को तोड़ने के लिए उतनी ही अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होगी।
$(ii)$ आयनों की जलयोजन एन्थैल्पी (Solvation enthalpy): यह वह ऊर्जा है जो तब मुक्त होती है जब एक मोल ठोस लवण किसी विलायक में घुलता है। लवण को घुलने के लिए,आयन-विलायक अंतःक्रियाओं से मुक्त ऊर्जा (जलयोजन एन्थैल्पी) क्रिस्टल जालक में आयनों को एक साथ रखने वाले मजबूत स्थिर वैद्युत बलों (जालक एन्थैल्पी) को दूर करने के लिए पर्याप्त होनी चाहिए।
इसलिए,एक लवण विलायक में तभी विलेय होता है जब जलयोजन एन्थैल्पी जालक एन्थैल्पी से अधिक होती है। यदि जलयोजन एन्थैल्पी जालक एन्थैल्पी से कम है,तो लवण अविलेय रहता है।