(N/A) द्रव्यमान और ऊर्जा की तुल्यता: अल्बर्ट आइंस्टीन ने प्रस्तावित किया कि द्रव्यमान और ऊर्जा आपस में परिवर्तनीय हैं,जो समीकरण $E = mc^2$ द्वारा संबंधित हैं,जहाँ $E$ ऊर्जा है,$m$ द्रव्यमान है,और $c$ निर्वात में प्रकाश की गति $(3 \times 10^8 \ m/s)$ है। इसका अर्थ है कि द्रव्यमान की एक छोटी मात्रा को ऊर्जा की बड़ी मात्रा में परिवर्तित किया जा सकता है।
$(b)$ परमाणु ऊर्जा: यह परमाणु प्रतिक्रियाओं के दौरान मुक्त होने वाली ऊर्जा है,जैसे कि परमाणु विखंडन (भारी नाभिक का विभाजन) या परमाणु संलयन (हल्के नाभिकों का संयोजन)। मुक्त ऊर्जा 'द्रव्यमान क्षति' (mass defect) के कारण होती है,जहाँ उत्पादों का द्रव्यमान अभिकारकों के द्रव्यमान से थोड़ा कम होता है,और यह अंतर $E = \Delta mc^2$ के अनुसार ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है।
$(c)$ ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत: यह सिद्धांत बताता है कि ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है,इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। एक विलगित निकाय (isolated system) में,कुल ऊर्जा समय के साथ स्थिर रहती है।