(N/A) जब एक $p-n$ जंक्शन बनता है,तो सांद्रता प्रवणता के कारण इलेक्ट्रॉन $n$-क्षेत्र से $p$-क्षेत्र में और होल $p$-क्षेत्र से $n$-क्षेत्र में विसरित (diffuse) होते हैं।
जैसे ही इलेक्ट्रॉन $n$-क्षेत्र छोड़ते हैं,वे पीछे धनावेशित दाता आयन छोड़ जाते हैं। इसी प्रकार,जैसे ही होल $p$-क्षेत्र छोड़ते हैं,वे पीछे ऋणावेशित ग्राही आयन छोड़ जाते हैं। ये अचल आयन जंक्शन के पास एक ऐसा क्षेत्र बनाते हैं जिसमें मोबाइल आवेश वाहक नहीं होते,जिसे अवक्षय क्षेत्र (depletion region) कहा जाता है।
यह आवेश वितरण $n$-पक्ष से $p$-पक्ष की ओर निर्देशित एक विद्युत क्षेत्र बनाता है। यह विद्युत क्षेत्र जंक्शन पर एक विभवांतर उत्पन्न करता है,जो आवेश वाहकों के आगे विसरण का विरोध करता है। इस विभवांतर को बैरियर विभव $(V_0)$ कहा जाता है।
साम्यावस्था में,बैरियर विभव आगे के विसरण को रोकता है,जिससे डायोड की आवेश तटस्थता बनी रहती है।